Hindi Quote in Poem by Bhuwan Pande

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जगमगाते तारों ने पूछा सूरज से
क्या है कीमत तुम्हारी ?

सूरज ने कहा
जाने कितनी ही शताब्दियों से
हर पल, हर क्षण
लगातार, बिना थमें
मैं तपता जलता रहा हूं

मैं क्या जानूं अपनी कीमत
बस जलना ही मेरी फितरत है
नहीं जानता कुछ और मैं

क्यों नहीं पूछते तुम कीमत मेरी
मेरे इर्द गिर्द घूमती धरती से
जाने किस आकर्षण से
मेरे चक्कर लगाती रहती है !

तारों ने टिमटिमाते हुए
एक नज़र झांका दूर धरती पर
और पूछा कि क्या तुम जानती हो
दूर उस जलते सूरज को
क्या कीमत है उसकी तुम्हारे लिए ?

धरती ने कहा - अरे वो सूरज
हां रोज़ ही तो मैं देखती हूं उसे
मेरे दिन बस उस की ही बदौलत हैं
उसकी किरणें मेरे चहरे का उजाला है
और उसका ना दिखना मेरी रात है
वो जलता है तो मुझ पर जीवन पलता है

उस दूर दहकते सूरज की कीमत
उसके स्वयं तपकर जलकर
दूजों को जीवन देने में है

:- भुवन पांडे

#किंमत

Hindi Poem by Bhuwan Pande : 111410819
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