#Belong My Touching Poem...!!!
हर देश हर दिन दिल से कोशिश
व मेहनत भी कर तो रहा हर रोज़ है
यारों आज वैज्ञानिकों के कंधों
पर ही हमारी उम्मीदों का बोझ है
आज जीते जीं न हाल मुहाल हे
ओर मर के भी जाँ जैसे दोज़ख़ है
प्रभु ने दी शायद कर्मों की सज़ा है
या इन्सानों की ही घटिया ग़लत खोज है
क़ाबू करने से पहले बेक़ाबू COVID
हो गया लेबोरेटरी से, या यह संयोग है
सच-जूठ तो प्रभु या रब ही जाने पर
पर आज इन्सानी लाशों के तो ढेर है
कब ख़त्म होगी मौत की यह वजह
सेवानिवृत्त-सेवाकर्मियों की ख़ैर है
दाकतर नसँ मेडिकल कर्मियों के
शबर की भी दाद, न रात न सुबह है
फ़ज़ल कर या रब ईश्वर अल्लाह प्रभु
तूं जो भी है पर तूं ही आख़री आश है
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