जन्म जन्म का साथ (हास्य लेख)
-------------------------
कुछ लोग जन्म लेते हैं । कुछ अवतरित होते हैं ।मगर कुछ लोग अनायास टपक जाते हैं । मेरा मित्र बाबूलाल इसी टपका श्रेणी का था । कहते जब जन्मा था पैदा होते ही खूबसूरत नर्स के गाल काट लिए थे । यह रहस्य आज तक बना है कि पैदा हुए बच्चे के दांत तो होते नहीं काटा कैसे होगा ।(हालांकि कुछ लोगों के पेट में दांत होते हैं )
बाबूलाल की नाक के नीचे जब भुरभुरी सी मूंछें उग आई
थी तब वह इस बात से मुतमिईन हो गया कि वह जवान हो गया है और धर्मेंद्र जैसा दिखता है ( शक्ल केस्टो मुखर्जी की थी )।साथ ही यह खुशफहमी हो चली की वह जिस लड़की पर नज़र डालेगा वह उसके आगे बिछ
जायेगी । लड़कियां छेड़ने की झक सवार हो गई थी बाबूलाल को ।इस चक्कर में वह कई लड़कियों को
फब्तियां कसता कभी किसी लड़की की चोटी भी खींच दी थी ।वो दौर काश्मीर की कली टाईप की लड़कियों का था
इसलिए लड़कियां प्रतियुतर में महीन आवाज में 'बतमीज'
कह देतीं तो बाबूलाल और ज्यादा खुश होता था।
एक लड़की पर वो इस कदर फिदा हुआ कि उसने
उसे बीच राह में रोक कर लेटर देने की कोशिश की ।
मगर उस युग में अखाड़ों का चलन भी था उस लड़की का भाई महावीर अखाड़े का संचालन करता था । फिर उस पहलवान ने अपने पठ्ठों के साथ बाबूलाल जी की वो धुनाई की , कि जब मैंने उसे राह मे पड़े देखा तो बाबूलाल
का बाबू का तो पता नहीं था बस सब तरफ लाल ही लाल
बिखरा हुआ था ।
बरसों बाद आज वह बाबूलाल मुझे आलू टिन्डे का भाव करते सब्जी बाजार में मिल गया । बहुत खुश हुआ बचपन के मित्र को देख कर जबरदस्ती अपने घर ले चला।
'चलो यार चाय पी लो तुम्हारी भाभी से मिलवाते हैं ।'
वाकई बाबूलाल ने हाथ तो तगड़ा मारा था उसकी पत्नी
बहुत खूबसूरत थी ।
मैंने कहा -यार भाभी जी तो बहुत सुंदर हैं।सुना है सात जन्मों का साथ होता है ।
- हां यार , जितनी दिखती है उससे ज्यादा है मेरे तो सर के बाल नुंच गये ये आखरी सातवां जन्म हो तो ठीक है ।
चाय लेकर भाभी जी आ रहीं थीं उन्होंने ने बाबूलाल की
बात सुनली । मेरी ओर उन्मुख होकर बोलीं-
'भाई साहब मैं तो अगले जनम में भी इनको ही मांगू'
-अच्छा इतना अच्छा लगा है मेरा मित्र आपको ।
"ना जी अच्छे वच्छे की कोई बात नहीं है बड़ी मुश्किल से
मैंने संवारा है इस बिखरे चमन (बगीचे)को अब फल और किसी को न खान दे ऊं भाई साहब ।
सात जनम पीछा न छोडूं ।