Ruchi Dixit लिखित उपन्यास "इच्छा" मातृभारती पर फ़्री में पढ़ें
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उन सभी पाठको की मै आभारी हूँ ,जो मेरी इच्छा की अभिव्यक्ति मे अपना सहयोग दे रहे है. इच्छा की कहानी मात्र कोरी कल्पना नही , यह किसी के जीवन से प्रभावित है, आप के आपके आस -पास भी कई इच्छायें होंगी .ऐसी ही एक इच्छा को मैने मंच तक लाने का सामार्थ्यानुसार प्रयास किया है. इसकी अभिव्यक्ति ही उसकी विशेषता है. हिन्दी के प्रति मेरी आपार श्रद्धा है, इसमे की गई त्रुटियाँ क्षमा योग्य नही ऐसा मेरा दृष्टिकोण है. इच्छा को लिखने मे शाब्दिक,साहित्यक व अन्य कई प्रकार की त्रुटियाँ हुई है.हिन्दी मेरी माँ कि तरह है जैसे एक बच्चा टूटी -फूटी भाषा को भावना से माँ के हृदय तक पहुँचाता है ऐसी ही मेरी ये माँ (हिन्दी) मेरी गल्तियो को क्षमा कर अपनी गोद मे बिठा लेगी. ऐसी मेरी कामना है.अपने लिए लेखिका शब्द का उपयोग मेरे लिए शायद बड़ा हो जाये इसलिए यह उपयुक्त न होगा.स्वयं के बारे मे बस इतना कहना चाहुँगी कि भावना के आवेश मे कलम उठाने का जो साहस किया है ,उसमे आप सबके सहयोग की आपर आवश्यकता है.