ना आदि से ना अंत से,
शून्य और अनन्त से
किंचित भी चिंतित नहीं,
शून्य ही आधार है,
शून्य निराधार है,
जब शून्य है तब आस है,
जो शून्य हो तो -
खोने को कुछ ना पास है,
आंनद ही हर क्षण में है,
आशा किरण हर कण में है,
यदि शून्य को भी छोड़ दे,
आशाओं को भी तोड़ दे,
तो क्या धरा पर रह जाएगा
और क्या धरा रह जाएगा
सब शून्य हो जाएगा