इस छोर से उस छोर तक, बस शून्य है - सब शून्य है
शून्य से इतर नहीं जीवन, शून्य से तितर- बितर जीवन
बस लगाने और शून्य, हो सभी भ्रष्ट - है शून्य ही से त्रस्त
लोकहित छोड़, हो गए है शून्य, शून्य को ही शून्य कर
भूलकर शाश्वत शून्य से भरा, जीवन - दुःख का उपवन
#शून्य
#षणानन