तो उसे बरसों पहले पता था "लॉकडाउन" के बारे में?
आप कोई पार्टी ज्वॉइन क्यों नहीं कर लेते?
इस सवाल पर वो बिफ़र पड़ा।
बोला- मुझे तो सही को सही, और ग़लत को ग़लत कहने की आदत है। एक दल में आ गया तो मुझे दूसरों के इत्र में भी बदबू और अपनों की विष्ठा में भी खुशबू आने लगेगी।
कोई कहेगा, हमारे साथ मजमे में चलो, कोई कहेगा "नौटंकी करनी है, आ जाओ"!
अभी कम से कम चैन से घर में बैठे तो हैं!