व्यर्थ जीवन का अर्थ
क्या मेरा जीवन ही व्यर्थ है,
क्यों नहीं इसका कोई निर्धारित अर्थ है।
क्या जिंदगी देगी मुझे दोबारा सँभालने का मौका,
क्योंकि सब कुछ उड़ा के ले गया एक हवा का झोंका।
उस दिन मेरे दिल ने मुझे कई बार टोका,
किन्तु मेरे दिमाग ने एक बार भी न मुझे रोका।
एक डर छोड़ गया अपने निशां मेरे मन में,
गहरे दाग छोड़ गया वो मेरे तन में।
कैसे मिटा पाउगा में उन जख्मो को,
याददाश में बैठा चूका हूँ में उन गमो को।
डर लगता है मुझे सब कुछ खोने का,
मन करता है मेरा अनिश्चित काल तक रोने का।