कितने बहुमूल्य थे हमारे पालनहार जिन्होंने अपनी सारी उस समय की जरूरतों को ताक पर रखकर अपने अरमानों का गला घोंटकर हमे अच्छे से अच्छा खिलाया पिलाया अपनी अच्छी हेसियत ना होते हुये इधर उधर से कर्जा ले उधार लेकर हमे वो सब सहूलियतें उपलब्ध कराई आज हम जमाने के सामने हैसियत के साथ खड़े रहने के योग्य बनाया है, उनका ये हमारे प्रति समर्पण भुलाने योग्य तो कतई हो नही सकता । और होना भी नही चाहिए जो ऐसा करते है कहते है कि उस समय हमारे माँ पिता ने जो किया वो उनका दायित्व था इसमें उनका क्या है उन्हें में अच्छा इंसान ही नही मानता हूं । माँ पिता का तो कभी मूल्यो का आकलन किया ही नही जा सकता है वो तो हमारे जीवन के अंत तक अनमोल बहुमूल्य ही बने रहेंगे सदैव ।†*****कमलेश शर्मा "कमल" 13-4-20
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