भरे उन्माद ,प्रेम ,हृदय को भी चीर दे.
नीर भरे नेत्र मे, हौसला ,अधीर दे.
सो चुके विश्वास को ,झकझोर के उचास दे
"मूर्छा" सी , मृत पड़ी ,साहस को जो उभार दे .
वह शब्द मूल्य माँगते हैं वेदना विकास का.
बात करते सूर्य ,किन्तु ,अंधेरे मे निवास का.ruchi
#मूल्य