सिख लो।
लक्ष्य आसमान छूने का हो तो,
दर्द को पालना सिख लो।
क्योंकि दर्द अपने ही देने वाले है,
जरा बर्दाश्त करना सीख लो।
जो हांसिल करना चाहते हो तुम,
वो तुम्हारे सपने ही है।
राह जो चुनी है तुमने,
उसपे कांटे बिछाने वाले अपने ही है।
तो हर एक कांटा निकालना सिख लो।
जब राँहो में कांटे ही बिछे है,
यह जान गए हो तुम,
तो हर कांटे के जख्मों का,
इलाज करना सीख लो।
मअलूम है यकीनन की,
यह रास्ते ही हमारी मंज़िल है,
ओर अगर मंज़िल को है पाना
तो हर दर्द में शिरकत होना सीख लो।
Dilwali kudi