#अल्टीमेट (उत्कृष्ट ,परम्,चरम)
न होता कोई डर हमको ,न होता भय यूँ मरने का ,
तो जाने और क्या-क्या करते हम ,वैसे ही कम हैं क्या ?
हमीं तो हैं परम्,हम ही चरम ,सभी अपनी खुदाई है ,
अभी भी वक़्त है ,सोचें,क्या की हमने कमाई है ?
ये तो कितने उदाहरण ईश ने हमको दिखाए हैं ,
अभी भी सोच लें हम कितने साए हम पे छाए हैं |
हमारी पीढ़ियाँ कोसेंगी हमको ,अब भी समझें हम ,
जो ये आपद की घड़ी आई ,उसीसे कुछ तो सीखें हम | |