सादर नमस्कार सभी मित्रों को
, आज का हमारा विषय है - ईर्ष्या !
आज कल मनुष्य अपनी जिंदगी में हमेशा आगे बढ़ना चाहता है लेकिन बहुत काम आगे बढ़ पा रहा है क्यों ?क्युकी आज कलयुगी प्रवत्ति होने के कारण मनुष्य दूसरे मनुष्य को सफलता को समझना ही नहीं चाहता है |वह खुद की तरक्की या अपने को उठाने ने उतनी ऊर्जा नहीं लगाता जितनी दूसरे मनुष्य को गिराने में लगा देता है |अर्थात इंसान में ईर्ष्या की प्रवत्ति बढ़ती चली जा रही और और वह ईर्ष्यालु बनता जा रहा है |और इंसान को अगर आगे बढ़ना है तो ईर्ष्यालु न बनकर दयालु बन ना पड़ेगा |धन्यवाद ,
आपको यह लेख कैसा लगा बताईएगा जरूर , इन्तजार रहेगा आपकी बहुमुल्य टिप्पड़ियों का |
आपका अपना
एस के मिश्रा