आज तेरे दरबार में माँगू सबकी खैर ,
मन में भी मैं न करूं कभी किसी से बैर |
ईश्वर की सौगात है जान सके तो जान ,
हर प्राणी में वो बसे सबको अपना मान |
उसने तो सबको दिया ,ऊर्जा, रोशन,ताप,
तुमने द्वार ढुका लिए ,भर मन में संताप |
गलत-सही का कुछ यहाँ नाप नहीं है मित्र ,
संबंधों को स्नेह दो,बनेगा सुंदर चित्र |
द्वार प्रणय का जब खुले ,फूल खिले चहुँ ओर,
द्वार प्रणव का जब खुले ,मुस्काए हर भोर | |