जिंदगी बस कर अब थक चूका हूं मैं,नए नए चेहरे को पढ़कर पक चूका हूं मैं,
मौसम इतने आए और गए इस सफर में मेरे, कि तेरी हल्की बारिश और तेज हवाओं को समझ चुका हूं मैं,
जिंदगी बस कर अब थक चूका हूं मैं,
तेरी कहानियों से मलाल नहीं कोई,उन कहानियों का खत्म होने का डर रहता है,
सही वक्त में हर कोई साथ होता है मेरे,बूरे वक्त में ढूंढता हूं कौन मेरे साथ रहता है,
इस तरह सोई है रातें मुसीबत के किनारे रहकर,कि वक्त बीतता रहा दिन मेरा और रातें थकी हारी वहीं देकर,हर सुबह मेरे हाल पुछता है,
और वक्त भी मेरे वक्त की कीमत पुछता है,बता दें वक्त को की भटक चूका हूं,
जिंदगी बस कर अब थक चूका हूं मैं,
टेढ़े मेढे रास्तों से डर नहीं, बस लोगों से डर लगता है,
मिलकर तुफानों से ये दिल घबराता नहीं,बस नकाबी चेहरों से डर लगता है,
कभी हंसता हूं कभी रोता हूं खुदके खोने से नही,
अब इतना टूट चुका हूं कि टूटने से ज्यादा किसी के होने से डर लगता है,
और पीछे मुड़कर मंजिल भी देखती है राह मेरी, बता दें उसको की आधे रास्ते ही आया हूं मैं,
जिंदगी बस कर अब थक चूका हूं मैं!!
#ચહેરો