Hindi Quote in Poem by Chaya Agarwal

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खोदी गयीं रक्त रंजित दरारें
सड़कों पर देख रहीं थीं
अपने जैसा ही रंग
कुंठित दीवारों पर भी थीं कुछ छीटें
कुछ थीं अफवाहों के सपाट धरातल पर
धकेला हुआ द्रष्टिहीन रेला
दौड़ रहा था वेग में,

विवेकहीन लोभियों की रफ्तार से
उत्पन्न ऊर्जा को
बंदूक में भर कर चपल
दागता रहा उन पर
जो समेंट रहे थे राख के कण
और खोल रहे थे प्रकाश की उजली खिड़कियाँ,

सिसकियों से बँधा बजूद
सहमा रहा उन ध्वस्त हुये खण्डों से
जो खड़े थे प्रलय के अधखुले दरवाजे पर,

टूटती हुई निरीह पीड़ा में
निचोड़ कर ताकत की बूँदों को
सूखी हुई मांस-मज्जा लिये
दब जाते हैं सिकुड़े हुये बड़े शहरों के
अपाहिज कंकाल?????
छाया अग्रवाल
बरेली
दि. 28-2-20

Hindi Poem by Chaya Agarwal : 111349690
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