घायल सिना
जिल्लत भरा यह जीवन, कब तक जीना पड़ेगा ?
कब तक युही तेरी जुबां से तु तीर चलाएगा ?
दर्द होता है बेशुमार, घायल हो जाता है यह दिल;
खतरनाक है रास्ता; दिखती नहीं है हमें मंज़िल
चुभते है तीर, छलनी हो जाता है सिना हमारा;
कब तक और कैसे सहे, यह दिया हुआ, कातिल दर्द तुम्हारा
घायल है सिना हमारा; कातिल शब्दों के दर्द से है भरा
न दवा न कोई मरहम नज़र आता है; न जाने कब तक रहेगा यह घाव हरा ?
Armin Dutia Motashaw