तुझ पर धूप आए तो ‘आकाश’ बादल बन जाये....
मेरी टूटने की ख़बर पर तू दौड़ीं चले आए .....
तू अब नहीं पूछती मेरी तबियत-ए-हाल ,
सेहत को अपनी कह दिया मत बिगड़ना....अब तू नहीं है साथ
जाने से पहले तेरे शहर से....सुन एक बार लड़ लेते है ,
इसी बहाने आख़री बार फिर से मिल लेते है ..
-A A राजपूत ‘अक्श’