सुबह में कुछ तो बात है ,
वरना अन्धेरे को हराना हर किसी के बस की बात नहीं है
चाँदनी सी शीतल भी ढक जाती है
इस रोशनी सा उजाले में कुछ तो बात है
चाँद भी जिसकी रोशनी पा धाक जमाता है
उस सूरज की रोशनी में कुछ तो बात है
हर दिन नया ...सोच नई ..
सुबह में कुछ तो बात है ....।
“शुभ प्रभात “
-A A राजपूत ‘अक्श’