अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है
पर कहने को कुछ नहीं है
विरोध के सिवाय।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है
पर करने को कुछ नहीं है
पत्थर फेंकने के सिवाय।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है
पर बोलने को कुछ नहीं है
गालियों के सिवाय।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है
पर सत्य पर विश्वास नहीं है
झगड़ों के सिवाय।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है
और कहने को बहुत कुछ है
झूठ के सिवाय,
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है
और रचने को बहुत कुछ है
प्यार के साथ-साथ।
**महेश रौतेला