My New Poem ....!!!!
आज हवा में तेरा एहसास क्यों है...
या तो तू शहर मे है या फिर हवा तेरे शहर की है...
या फिर दिलकी बसनदगीमें बसा लिए है हम शहर..
तेरा एहसास तेरा ख़याल तेरा चेहरा तेरा अश्क़ तेरा..
अब तो हर-सूँ हर सींमत हर वादी हर फिझा हर डगर.
नज़र आए बस तूं ही तूं तूं ही तूं दिलकी आरज़ू भी तूं
यहीं वहाँ इधर उधर जहां भी देखन प्रभु नज़र 🧿 आए तुम.!