अत्यधिक भावुकता विष के समान होती है। असर तो रहता है, मगर महसूस धीरे-धीरे होता है, आज की दुनिया में अत्यधिक भावुक होना बेवकूफ़ी है। क्योंकि आप उन बातों या लोगों के लिए भी परेशान हो जाते हैं जिनका आपके जीवन में कहीं से कहीं तक कोई स्थान ही नहीं होता।
ऐसे लोग खुद ही खुद को परेशान करते हैं, बेवज़ह ही सारी दुनिया की परेशानी पर दुःखी होते हैं। पलकों पर आँसू रहते ही इसलिए हैं कि इन्हें किसी के लिए बहा दिया जाए।
इन्हें यह बात समझ नहीं आती की हमेशा हर इंसान सुखी नहीं होता। हमेशा सब मुस्कुरा नहीं सकते, मगर ये फिर भी लोगों के चेहरे गौर से देखते रहते हैं कि कहीं कोई परेशानी की शिकन तो नहीं है।
ये खुद भी जानते हैं कि इनकी ये प्रकृति इनके लिए विषाक्त है, और ऐसा व्यवहार मूर्खता।
ये केवल इनके लिए ही कष्टकारी है।
मगर सब जानते हुए भी इन मूर्खों में बदलाव नहीं आता और तो और इन मूर्खों में से एक हम भी है।
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#रूपकीबातें