इतनीभी क्या जल्दी है
थोड़ी देर ठहर तो जाओ
तरसती थी ये आंखें देखने को
जी भर के देखने तो दो
इतनीभी क्या नाराजगी है
थोड़ा मुस्कुरा भी दो
बर्सौ बाद मिले है
आज तो थोड़ा वक्त देदो
इतनीभी क्या रंजिशें है
थोड़ी सी गुफ्तगू तो करो
तरस गयें आवाज सुनने को
कुछ बोल भी दो
इतनीभी क्या नफरत करनी
अब माफ भी करदो
मोहोब्बत तुम्हे भी है
आज ये कबूल करलो