ख्वाब
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मेरे इन नयनों के तले,
जाने कितने ख्वाब पले ..
सुंदर महल बनाने का,
तारों से उसे सजाने का,
मन में बड़े अरमान पले,
मेरे इन नयनों के तले,
जाने कितने ख्वाब पले ...
पंछी बन उड़ जाने का,
बादलों तक जाने का,
लगा कर पंख उड़ चले,
मेरे इन नयनों के तले,
जाने कितने ख्वाब पले ...
तितली बन मुस्काने का,
कली कली खिलाने का,
फूल नये खिलाने चले ,
मेरे इन नयनों के तले ,
जाने कितने ख्वाब पले ....
नदी बन बलखाने का,
शहर शहर जाने का,,
सब की प्यास बुझाने चले
मेरे इन नयनों के तले
जाने कितने ख्वाब पालें .....
उमा वैष्णव
मौलिक और स्वरचित