मुलाकात
आज बड़ी मुश्किल से,
दिन ये आया है।
उनसे मुलाकात का,
अवशर पाया है।
यूँ तो उनसे कभी बात,
नही होती ,
बंजर भूमि में बरसात,
नहीं होती ,
बैठे हैं पास उनके हम,
पलकों को झुकाये ,
दिल की अपनी बात,
कैसे उन्हें बताये,
वो कहते हैं कि,
तुम कुछ बोलती नहीं,
राज अपने दिल के,
तुम खोलती नहीं,
तभी सुर्ख हवा,
गिर कर यूं आई,
चेहरे पर मेरे जुल्फ लहराई,
हटा कर जुल्फ मेरी,
वो मुझ से यूँ बोले,
तुम्हारी ये आँखे,
राज दिलों के खोले,
हम भी मुस्कुरा कर,
उनसे यूं बोले,
जब जानते हो सब,
तो क्यू बनते हो भोले,
दिल पर हाथ रख कर वो,
हम से यूँ बोले,
क्या करें दिल में जज्बात बड़े हैं,
तुमसे कहलाने के अरमान बड़े हैं।
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Uma vaishnav
मौलिक और स्वरचित