लघुकथा पर सार्थक चिंतन
माधव नागदा केमेस्ट्री के टीचर है हिंदी में कविता कहानी लघुकथा लिखते हैं उनसे परिचय नया है मगर काफ़ी समय से उनको पढ़ता रहा हूँ
उनकी ताज़ा आलोचना पुस्तक-समकालीन हिन्दी लघुकथा ओर आज का यथार्थ आइ है पुस्तक तीन भागों में विभक्त है —आलेख खंड समीक्षा खंड ओर साक्षात्कार खंड
आज लघुकथा एक विधा के रूप में है ओर यह पुस्तक एक सार्थक प्रयास है
पुस्तक में आमुख अशोक भाटिया का है पूर्व कथन बलराम अग्रवाल का है
माधव नागदा ने प्राक्कथन में लघुकथा पर सारगर्भित बात कही है
आलेख खंड में १३ भाग है समीक्षा खंड में ११चेप्टर्स हैं
साक्षात्कार खंड में माधव जी के चार इंटर्व्यू है जो लघुकथा को समझने में मदद करते है
लखकथा के शिल्प विषय कथा भाषा पर नागदा जी ने विस्तार से चर्चा की है
नए लेखकों के लिए यह पुस्तक पठनीय है
१९१पन्नों की किताब का मूल्य पाँच सो रुपया है जोज़्यादा है
आवरण अच्छा है बाइंडिंग व पन्नों की कटिंग कमज़ोर हैइसे सूर्य प्रकाशन मंदिर ,बीकानेर ने छा पा है .
इस महत्वपूर्ण पुस्तक के लिए नागदा जी को बधाई व शुभकामनाएँ००००००
यशवंत कोठारी ,८६,लक्ष्मी नगर ब्रह्मपुरी बहार ,जयपुर –मो-९४१४४६१२०