Hindi Quote in Blog by महेश रौतेला

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बच्चों की दुनिया में कुछ पल:

इस बार भी पिछले साल की तरह बच्चों के विद्यालय में दादा-दादी,नाना-नानी और आमंत्रित वरिष्ठ नागरिकों के लिए लिए कार्यक्रम रखा था। व्यवस्थापकों, शिक्षिकाओं और अन्य सदस्यों ने अच्छी व्यवस्था कर रखी थी। कार्यक्रम का आरम्भ, बच्चों की प्रार्थना से हुआ। फिर एक डाक्टर (फिजियोथैरेपी की) ने संक्षिप्त सुझाव दिये। जैसे बुजुर्गों को बहुत लम्बा नहीं घूमना चाहिए ,एक या दो घंटे। लम्बा घूमने से जोड़ों में दर्द शुरु हो सकता है। हल्के व्यायाम करने चाहिएऔर योगासन जो सरल हों। इसके बाद तीन समूहों में सब बँट गये।
मेरे समूह में पहले हिन्दी गानों की अन्ताक्षरी हुयी। गेंद मेरे पास रूकी। पहला नम्बर मेरा आया। लाटरी निकाली तो चूड़ी हाथ में आयी। अब चूड़ी पर गाना ,गाना था। मैंने बोला मुझे चूड़ी पर गाना नहीं आता है। हाँलाकि, मन में आ रहा था," चूड़ी नहीं" आगे नहीं आ रहा था। उन्होंने कहा, कोई भी गाना गाइये। मैंने गाया," कोरा कागज था ये दिल मेरा, लिख दिया नाम इस पर तेरा------।" हाल ही में किसी ने इसका संस्कृत अनुवाद गाकर व्हाट्सएप पर भेजा था। फिर गेंद जहाँ रूकी उस महिला के हाथ बिंदिया आयी। उन्होंने गाया," बिंदिया चमकेगी,बिंदिया चमकेगी,बिंदिया चमकेगी" आगे उन्हें याद नहीं था। बार बार" बिंदिया चमकेगी" सुन कर हँसी के फुव्वारे फूट पड़े। फिर कागज के चिट उठाकर गाना गाना था,लेकिन सब ने अपने मन से गाया। किसी ने गाया था," लाड़ला कन्हैया मेरा----।" तो किसी ने," ये जो मोहब्बत है----"। पुराने गाने ही सबने गाये।अगले खेल में कागज के खाली गिलासों को फूक मारकर एक मिनट में दूसरी ओर प्लास्टिक की चौड़ी टोकरी में डालना था। टोकरी बच्चे को पकड़नी थी। जो जल्दी सब डाल देता या जिसके अधिक टोकरी में आ जाते,वह जीत जाता। दूसरे हिस्से में एक से पच्चीस तक गिनती के ऊपर, उसी नम्बर के अंक को छोटे कटोरे से उठा कर रखना था। अच्छी प्रतियोगिता हो रही थी। इससे आगे के खेल में लयात्मक शब्दों को पढ़ना था जल्दी जल्दी बिना गलती के, हिन्दी, गुजराती का विकल्प था। इसी के दूसरे खेल में दो समूहों में सबको बांट कर हिन्दी नायक या नायिका का नाम लेना था। जहाँ पर एक प्रतियोगी रूक जाता,दूसरा आरम्भ करता लेकिन पहले द्वारा लिया गया नाम लेने पर अंक काट लिए जाते और समय की भूमिका महत्वपूर्ण थी। अन्त में राष्ट्रगान हुआ और गेट से निकलते समय सभी बच्चों को पुरस्कार दिये गये। और सभी के हाथ में प्रतीकात्मक स्टार अंकित किया गया।
* महेश रौतेला

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