मानव काम क्या है फसाव ,उलझाव, पतन, सम्मोहन , त्तीव आकर्षण चरमता नशा बेहोशी, सब तोड बह जाना उतर जाना नीचे उतर हल्का होना गहराई बहुत भाव एक साथ उतर आते है विकार मुक्ति
एक साथ शान्त तलाब मे पत्थर फेकने पर लाखो लहर उठ जाती है मष्तिक में भरी पाजिटिव व नेगिटीव ऊर्जा मिलने का बलबला रही होती है
काम चहता तो उनके मिलने के लिए अवसर रचना
पर काम से जो शरीर तल है स्त्री पुरुष कभी पास नही आ पाते क्योकि काम में उतरते ही अपना व जोडे का शरीर खो जाता है दोनो के मध्य विशाल विभेद रच जाता है
काम की घटना घटने से पूर्व स्त्री पुरुष के मध्य विशाल विभेद रच जाता है हर स्त्री को नग्न देखेने के लिए हर तरफ ताका झाकी की सम्भावना खोजता पुरुष अपनी पत्नी के साथ काम मे उतरनने से पूर्व ही दिखना बन्द हो जाती है काम शरिरीक से अधिक मानसिक हो चित्र और विडियो मे नग्न स्त्री खोजता है अपनी पत्नि को सामने नग्न खडा होने पर भी देख
पाता सब मानसिक हो जाता है
क्योकि वह ऊर्जाओ में उतर जाते है ऊर्जाए ही खेलती मिटती है और सब शान्त हो जाता है।विराट खालीपन के साथ