Hindi Quote in Blog by Roopanjali singh parmar

Blog quotes are very popular on BitesApp with millions of authors writing small inspirational quotes in Hindi daily and inspiring the readers, you can start writing today and fulfill your life of becoming the quotes writer or poem writer.

मैं सुधर जाऊंगी (भाग-2)

हाँ मैं सुधर जाऊंगी, और बन जाऊंगी आदर्श नारी..
नज़रें नीची रखना सीख जाऊंगी, और सीख जाऊंगी ज़ुल्मों को सहना, उम्मीदों को दफन करना अपने ही सीने में..
कम बोलना भी सीख जाऊंगी, और आवाज़ भी अपनी धीमी रखूंगी।
मान लूंगी की मेरा अस्तित्व एक पुरुष के बिना अधूरा है,
मान लूंगी की मेरा संयम ही आदर्शवादी बनाता है मुझे..
हाँ मैं अब खामोश रह कर सब सह लूंगी, और बन जाऊंगी संस्कारी।
सब लोग कहते हैं मेरा मायका मेरा अपना नहीं पराया है, और तुम कहते हो ये ससुराल है मेरा, मगर मेरा अपना घर नहीं..
तो शायद मेरा अपना घर है ही नहीं, मैं ता-उम्र बेघर हूँ.. ये सच भी अपना समझ जाऊंगी, और मेहमान की तरह गुज़ार दूँगी ज़िन्दगी अपनी.. कभी इस मकान में तो कभी उस मकान में....
हाँ सबकी ज़रूरतों का ख्याल रखना फ़र्ज़ है मेरा, या शायद दायित्व.. ये जानकर भी क्या करना मुझको, मगर मेरी ज़रूरत को दरनिकार करना ज़रूर सीख जाऊँगी..
दफना दूँगी ख्वाहिशों को कहीं सिसकियों में मगर तुमसे शिकायत नहीं करूंगी।
तुमसे नहीं बताऊंगी अपने मन की उलझन, कोई दर्द भी साझा नहीं करूंगी, तुम्हें पहले ही दिन भर की थकान रहती है, तुम्हें और परेशान नहीं करूंगी मैं।
हाँ, मैं सुधर जाऊँगी, और बन जाऊंगी वो जो नहीं हूँ मैं..
मेरे तन के कपड़े भी तुम ही तय करना, और मेरी सोच भी ढाल लेना अपने अनुरूप। मेरे भविष्य को भी तुम पर ही छोड़ दूँगी..
मैं नहीं करूंगी अधिकारों की बात, हाँ मैं तुम्हारे अधिकार की वस्तु बन जाऊंगी, तुम इस वस्तु का जी भर उपयोग भी कर लेना और उपभोग भी..
और मैं क़त्ल कर दूंगी अपने अरमानों का, मार दूँगी अपने हर जज़्बात, गला घोंट दूँगी किसी उछलती हुई खुशी का..
और श्मशान बन जाऊंगी, अपनी ही लाश का..
रोज मैं भार उठाउंगी अपने कांधे पर इस बेजान, बेबुनियाद देह का, मगर संस्कारी और आदर्शों की एक मृत छवि बन जाऊंगी.. फिर एक आदर्शवादी नारी कहलाऊंगी..

हाँ, थोड़ा वक्त लगेगा मुझे, मगर मैं सुधर जाऊंगी।।

#रूपकीबातें

Hindi Blog by Roopanjali singh parmar : 111249326
New bites

The best sellers write on Matrubharti, do you?

Start Writing Now