थोड़े अधूरे ख्वाब थोडी मन्चाहि ख्वहिसे..
आधे कटे रास्ते आधी दिखी मंजिले..
दिखी है तो मिल ही जायेगी सोच के हम मुस्कुराये...
बोहोत मुश्किल है डगर पनघट कि ये समज ना पाये...
मंजिल थोड़ी धुन्धलि हुइ पाउ मेरे थके...
लक्ष्य पाने कि राह मे भरे मन हम डगे...
आधे टूटे सपने, आधि अनकही ख्वाहिसे...
घूटन हुइ नफ़रत हुइ खुद्से हि हम रुसे...
सिर्फ़ एक उम्मीद बाकि है आखरी एक राह बाकि है
मेरे ज़िन्दा रेहने बस एक बार कि मेरि आह बाकि है
बन्दे ने अपना काम किया...
खुदा तु भि कुछ कर...
हमसफ़र बन मेरा या केह
जा अकेले हि मर...
@yayawargi