कल रात जैसे ही सुषमा जी के निधन की खबर सुनी, तो पहला ध्यान भी स्वराज कौशल पर गया. एक उम्र का साथ था दोनों का. किसी ट्विटर यूजर को उन्होंने बताया था कि 1975 में intercaste लव मैरिज करना लीबिया या यमन में फंसे रहना जितना ही खतरनाक था. स्वराज कौशल उन रेयर मर्दों में से थे जिन्हें “मिस्टर सुषमा स्वराज” कहलाने में कोई परहेज़ नहीं था.
साहसी, बेलौस, बेलगाम स्त्रियाँ जब ऐसे प्यार में पड़ती हैं जहाँ उनके उड़ने की आजादी की डोर कहीं बंधी नहीं होती, वहां वो हँसते हुए आगे ही बढ़ती जाती हैं.
पिछले 41सालों से राजनीति में सक्रिय सुषमा ने जब 2019 में चुनाव न लड़ने का ऐलान किया, तो स्वराज ने कहा था-
"एक समय के बाद मिल्खा सिंह ने भी दौड़ना बंद कर दिया था. आप तो पिछले 41 साल से चुनाव लड़ रही हैं. मैं आपके पीछे 46 सालों से भाग रहा हूँ. अब मैं वो 19 साल का लड़का नहीं रहा. थक गया हूँ”
चार दशक के इस लम्बे साथ के बाद जब सुषमा ने दौड़ना बंद किया और स्वराज ने रिटायरमेंट के अपने प्लान बनाये होंगे, तो उसके दो महीने बाद ही सुषमा जी फिर से दौड़ पड़ी, अबकी बार न रुकने को.
कुछ रिश्तों के हिस्सों में लम्बा इंतज़ार लिखा होता है.
कुछ रिश्तों के कल, कल में ही रह जाते हैं .इसलिये रिश्तों को खुल कर जिये पता नही कब शाम हो जाये
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