काश्मीर की आवाज़
जितने भी थे पुण्य, सभी तुमको दे डाले
भारत के सैनिक तुम ही हो, काश्मीर के रखवाले
झेलम की बेरहमी, झेल रहा काश्मीर
वीर जवानों तुमने ही समझी, काश्मीर की पीर
खुद दस-दस घंटे पानी में रहकर
तुमने हमें बचाया, तुमने ही हमें बचाया
अपने खाने की सुध भूल-भाल कर
भोजन, पानी हम तक पंहुचाया
हाथ पकड़ तुमने हमको, डूबने से ही नहीं बचाया
प्यार से हाथ पकड़ कर, अपना भी हमें बनाया
दुख की कठिन घड़ी में, जो हाथ पकड़ लेता है
वो नहीं पराया बल्कि, कोइ अपना ही होता है
जितने दे आषीश सभी कम पड़ जाएगंे
भारत के वीर सपूतों, तुम्हंे कभी भुला न पाएगें
जुग जुग जियो जवानों, दिल से दुआ निकलती है
तुम हमारे, हम तुम्हारे, एक हमारी धरती है