पल भर....
ओस की बूँदो को,
पत्तों पर बिखरते देखा है।
हमने पल भर में,
इंसानों को बदते देखा है।
जुगनुओं को,
रातों में चमकते देखा हैं।
हमने पल भर में,
किस्मतो को बदलते देखा है।
अरमानों को,
आसूंओ में बहते देखा हैं।
हमने पल भर में,
रिश्तों को बदलते देखा है ।
Uma vaishnav
मौलिक और स्वरचित