ना चादर बढी कीजिए
ना ख्वाहिशें दफ़न कीजिए
चार दीं की है ज़िंदगी
बस चैन से बसर कीजिए,
ना परेशां किसी को कीजिए
ना हैरान किसी को कीजिए
चाहे दे कोई तम्हें लाख गालियाँ
बस मुस्कुरा के उन्हें लौटा दीजिए
ना रूठा किसी से कीजिए
ना झूठा वादा कीसी से किजीए
ना फ़ुरसत हो आज मिलने की
कल खुद से मुलाकात कीजिए ......।
AALIYAA