बरसों बाद खोला पिटारा तो निकल आई कुछ यादें ,
कुछ तीखी,कुछ कड़वी,कुछ मीठी सी यादें ,
कुछ को सहलाकर निकला तो कुछ भड़क गई यादें,
कुछ शरमाई हुई सी,कुछ गुस्साई सी यादें,
खोज कर बाहर निकाला तो आंसू टपकने लगे,
मेरे अश्रुओ को देखकर ख़ुद रोने लगी कुछ यादें,
फिर प्यार से देखा तो बहकने लगी यादें ,
आँखों में झांक कर देखा तो महकने लगी यादें,
दिल पर पथ्थर रखकर बरामदा बंध करने गया,
तो दौड़कर आँखों के ज़रिये मुझ में समा गई वो यादें........
~अद्वैत