MATRUBHARATI marathi
#KAVYOTSAV_ 2
# marathi kavita
कविता- खटकतं मला
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खटकतं मला
वागणं बोलणं
मनातलं त्यांच्या
ओठावर न येणं...
खटकतं मला
भान न ठेवता
बोलणारे लोकं
नको ते बोलतात...
खटकतं मला
मिजास करणारे
घमेंडी लोक हे
तुच्छ लेखतात
सामान्य जनासी....
खटकतं मला
माणसं आताशा
शब्दा फिरवती
टोप्या बदलती
जसे वारे वाहती ....
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कविता- खटकतं मला
-अरुण वि.देशपांडे-पुणे
9850177342
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