सुनो ना
आज की शाम का मौसम बहुत खूबसूरत है । चलो
चलते हैं उसी जगह , जहां कई लम्हे ,कई पल ,कई घंटे, हमने साथ साथ बिताए थे। मूंगफली चने और मुरमुरे खाए थे,
माली से छुपके फूल तोड़ हमारे बालों में लगाए थे।
सबकी नजरों से बचते बचाते हैं,
सबसे सुनसान जगह पर
जिंदगी को बाहों में भर,
कभी पेशानी पर कभी अधरों पर
चुंबन बरसाए थे।
गोद में सर रख सोने की तमन्ना,
हाथों का स्नेहिल प्यार भरा स्पर्श,
आज भी मेरे एहसासों में जिंदा है।
आज भी तू मुझ में जिंदा है।
रक्त स्त्राव मैं बहता तूफ़ान सा
मेरे रोम रोम में तू ही तू,
पार दर्शित दिखाई देता है।
लम्हातो में बितती जिंदगी,
को फिर एक शास्वत सत्य दे जाना है।
तेरे साथ हां तेरे साथ फिर उसी जगह जाना है।
डॉं प्रियंका सोनी "प्रीत"