अलख जगाने आया हूँ मैं..........
अलख जगाने आया हूँ मैं, गीत सुनाने आया हूँ।
राष्ट्र चेतना जगे दिलों में, उसे जगाने आया हूँ।।
देश प्रेम ही धर्म बड़ा है, उसे बताने आया हूँ।
आजादी के पूर्वकाल की, याद दिलाने आया हूँ।।
वीर सैनिकों के माथे पर, तलक लगाने आया हूँ।
मातृभूमि का फर्ज चुकाने, मीत बनाने आया हूँ।।
सेना को जो पत्थर मारें, वही देश के दुश्मन हैं।
ऐसे घर के गद्दारों को, जेल कराने आया हूँ।।
आस्तीनों में पले सपोले, उन्हें मसलने आया हूँ।
जात पाँत मजहब के झगड़े, शांत कराने आया हूँ।।
दोहरे मापदंड जो जीते, उन्हें चेताने आया हूँ।
नापाकी जो चालें चलते,सबक सिखाने आया हूँ।।
काश्मीर है मुकुट देश का,भारत का वह गौरव है।
अपमानित जो करें विधर्मी, उन्हेंकुचलने आया हूँ।।
दमके देश भक्ति का सूरज, उसे उगाने आया हूँ।
नागफनी जो उगी देश में, उसे हटाने आया हूँ।।
मनोज कुमार शुक्ल "मनोज "