love poem
तेरा मौसम की तरह कुछ ऐसे मुस्कराना
यू हवा ओ मै मुकम्मल चमन फैलाना...!!
मेरा बैतहासा प्यार की ओर चले जाना
पता है मुझे तुम्हारे इश्के-ऐ-बदौलत है ....!!
बेहिसाब मन्नत की और तेरा इश्क़
चला आता मेरी मन्नत के धागे की और...!!
फिर भी जब आई हिचकी मुझे
ख़्याले-ऐ-प्यार तेरा ही याद आया...!!
तेरे एक मेसेज का इंतजार भी
मेरी इन निगाहो से होता है हर-दम...!!
एक तु हुनरमंद है जिससे दिल्लगी है मुझे,
जिसने खुदगर्ज़ की तरह प्यार सिखाया है....!!
ख़ूबसूरत जन्नत हमारी-तुम्हारी इश्के-ऐ-दुनिया
हमे नहीं चाहिए ,हमारे बीच लोगों की भीड़....!!
तु इश्क़ वो चाँद है जो दिखता तो है सबको,
पर उसे पाना सब के बस की बात नही..!!
तेरा-मेरा वो जहा है जहा से कोई शिकायतें-ऐ-शिकवा
सिर्फ में तेरी और मेरी हर एक परछाही भी तु....!!