*#काव्योत्सव के लिए कविता
हमारी संस्कृति*
विविधता में एकता
भारतीय संस्कृति की शान है
हमारी संस्कृति हमारी पहचान हैं।
सम्मान बड़ों का करना
छोटों को स्नेह आशीष देना
हमारी संस्कृति की पहचान है।
प्रभु से पहले मां को पूजें
फिर जस दूजे का गावे
हमारी संस्कृति की पहचान है
नदियों को भी माता पुकारे
वृक्षों में भी देव विराजे
हमारी संस्कृति की पहचान है
ऋषि मुनियों का आदर होता
दर से कोई न भूखा जाता
हमारी संस्कृति की पहचान है
मेहमान को भगवान सम जाने
सेवा अवसर पाकर माने
हमारी संस्कृति की पहचान है
सब धर्मों की समता दिल में
नहीं बैर कोई आपस में
हमारी संस्कृति की पहचान है
*अर्चना राय भेड़ाघाट जबलपुर मध्य प्रदेश