#kavyotsav2
विषय : भावनाप्रधान
|| वक़्त
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जिंदगी के सफर में यूँ चलते गए ।
दूर बचपन से पल-पल निकलते गए॥
वक़्त ने ही सिखाया बहुत कुछ हमें,
पहले गिरते गए, फिर संभलते गए॥
वक़्त की ही इनायत से सब कुछ मिला ।
है कहीं पर मुहब्बत तो कहीं पर ग़िला ।।
फिर भी तनहा नहीं इस सफ़र में हुए,
क्योंकि हमको सहारा तुम्हारा मिला ॥
वक़्त की ही जरूरत में ढलते गए।
रंग हम भी हजारों बदलते गए॥
वक़्त ने ही सिखाया बहुत कुछ हमें. . .
यूँ तो पलकों के भीगे किनारे भी हैं।
हमसे रूठे हुए से हमारे भी हैं ॥
है सिसकती सी ख्वाबों, खयालों की दुनियां,
घाव दिल में छुपे कुछ हमारे भी हैं॥
फिर भी कांटों में फूलों से खिलते रहे।
रोज हँस कर जमाने से मिलते रहे ॥
वक़्त ने ही सिखाया बहुत कुछ हमें।
पहले गिरते गए फिर संभलते गए ॥