#kavyotsav -2
#शहर नही गावँ चाहता हूँ#
शहर नही गावँ चाहता हु
मिलती मन को शांति
जहाँ है भाई चारा
बसती है जहाँ आत्मा लोगो में
प्रकृति झूमती है जहाँ
अपने सहज रूप में
शहरों के कोलाहल से दूर
प्यारा स्थान चाहता हूँ
शहर नही गावँ चाहता हूँ
शहर की तंग गलिया
दिन ब दिन छोटे होते कपडे
अकेलेपन से लड़ते लोग
अब ऐसे
जगह से आराम चाहता हूँ
शहर, नही गावँ चाहता हूँ।
मिल साथ बैठ कर बाते करना
बगीचों में बच्चों का खेलना
त्योहारो में मिल जुल कर रहना
खेतो में मिलकर साथ काम करना
शहरो के एसी(ac) नही
गावँ के पीपल की छावं चाहता हूँ
शहर, नही गावँ चाहता हूँ