#काव्योत्सव -2
॥ रिश्ते खिलौने हो गए ॥
# भावनाप्रधान
खेलते जज्बात से, रिश्ते खिलौने हो गए ।
आज के इस दौर में ,संबंध बौने हो गए ।।
स्वार्थ के संसार में ,सच खो गया जाने कहां ?
सब के दिलों पर राज करता,’ झूठे ‘बिछौने हो गए ।
बढ़ गई है दूरियां ,जाने क्यों अपनों के बीच ?
तल्खियों के बीच में ,दाम पौने हो गए ।
कौन जीता ,कौन हारा ,शब्द गूंजता रहा ,
हारने वाले के सपने ,ही विराने हो गए ।
जिनको भरोसा खुद पर था, वह कभी हारे नहीं ,
जो दूसरों के आसरे ,उनके फसाने हो गए ।
जुल्म जब बढ़ता गया ,सरहदो को पार कर ,
नफरतों में बाँटकर , फिर दो मुहाँने हो गए ।
सर्वधर्म ,समभाव के ,गीत जब बजने लगे ,
दो दिल एक जान के ,फिर सब दीवाने हो गए ।
नमिता “प्रकाश”