kavyotsav -2
"मेरे पापा"
मैं निशब्द रह गई ,आज
मेरी आत्मा ने मुझे झकझोर दिया
आज पहली बार ऐसा हुआ कि
मैं परीक्षा देकर घर आई ,और
नहीं था कोई यह पूछने वाला
तुम्हारा परिक्षा कैसा गया ?
नहीं था कोई पेपर देखकर यह
कहने वाला कि पेपर तो तुम्हारे
अनुकूल ही तो था ।और इतना
सुनकर मेरा कह देना ,पापाजी
परीक्षा बहुत ही अच्छा हुआ।देखना
बनता था पिताजी की खुशी।और हर
पेपर पर मार्किंग कर देना कि लगभग
इतना नंबर आएगा ।यह कोई
और नहीं एक पिता ही कर सकता है ।
चेहरा आंसुओ से भींग गया।
छुपकर फुट -फुट कर रोना और
अपने आप को सांत्वना देना
रह गया दिनचर्या ......