Hindi Quote in Poem by Rj Krishna

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आलेख
घरेलू  समस्याएं

घरों में खाने को लेके बडा ड्रामा होता है
किसी को दाल, आलू
किसी को लौकी टिंडे पसंद नहीं
और अगर घर में कद्दू बन जाए
तो पूरे घर में सन्नाटा छा जाता है
फिर कोई अचार से कोई नमकीन से रोटी खाता है 
तो कोई मेगी बनाता है 
लेकिन उस कद्दू को कोई हाथ नहीं लगाता 
जो उस कद्दू को मार्केट से लेकर आया
वह खुद भी उसको नहीं खाता 
अरे यार जब कद्दू खाना ही नहीं था 
तो लेके क्यों आया


खाने की दृष्टि से घर में दो तरह के लोग होते हैं 
एक जिनको सुखी बिल्कुल बुझी हुई सब्जी पसंद होती है
और दूसरे वो जिनको गिली सब्जी पसंद होती है 
सूखी या गिली कोई भी सब्जी बना दो
ड्रामे तो होने ही हैं
खुश कोई नहीं होता
खाना बनाने वाला फंसा रहता है

घर में और भी दो तरह के लोग होते हैं
एक वो जिनके पूरे 32 दांत सलमत होते हैं उनको कोई समस्या नहीं होती।
बस सब्जी उनकी पसंद की हो
और उसमें कद्दू गिलकी टिंडे यह तो बिल्कुल भी न हो
इसके अलावा कुछ भी दे दो
पतली या गिली मैटर नहीं करता

और दूसरे लोग बे होते हैं 
जिनके पूरे दांत गिर चुके होते हैं 
जिनके थोड़े बहुत दांत गिरे हैं बाकी के सलामत है उनका तो ठीक है लेकिन
जिनके पूरे दांत झड़ चुके हैं
उनके साथ बड़ी समस्या है 
उनके पसंद की सब्जी हो तो ठीक है
नहीं हुई तो बिल्कुल ठीक नहीं है 
बिना दांत बालों को सूखी सब्जी पसंद होती है लेकिन खा नहीं सकते 
उनको चाहिए होती है गिली सब्जी 
सूखी सब्जी बना कर दो तो 
एक ही डायलॉग मिलेगा 
"तुमको समझ नहीं आता, दांत नहीं है 
सूखी सब्जी से रोटी कैसे खाऊंगा" 
और आप सूखी सब्जी के साथ
गिली सब्जी बना दो 
तब बिना दातों वाले इंसान
खाते वही है सूखी सब्जी रोटी से
तब कोई समस्या नहीं होती
समझया होती है खाली डायलॉग देने के लिए।

 एक होता है  रायता 
जो दही और मट्ठे से बनता है 
आप रायता  अकेला बना कर दो 
तो सुनने को मिलेगा 
" रायते से भी कभी रोटी खाई जाती है क्या"
बिल्कुल नहीं खाएंगे रायते से रोटी 
और दही के रायते के साथ लौकी बना कर दो मजाल है कोई लोकी को हाथ लगा दे 
फिर सब रायते से ही रोटी खाएंगे

एक ड्रामा होता है रात के खाने को लेके 
रात का खाना सुबह में कौन खाएगा
रात में अगर आलू की सब्जी बनी हो 
वह सुबह में बच जाए 
तो उसको कोई नहीं खाएगा ।
और अगर रात में पनीर की सब्जी बनी हो
वह सुबह में बच जाये
और उसी दिन सुबह में कद्दू बन जाये
तो फिर कद्दू को कोई हाथ नही लगायेगा
सब रात की सब्जी पनीर ही खाएंगे 

एक और भी समस्या है 
जो कभी भी समाप्त नही होती है 
सुबह हो या शाम 
दोनो समय एक ही सबाल
फ़्रिज मे चाहे सब्जियों का अमबार लगा हो 
पर महिलाए सबाल यही करती है "क्या बानये? "
✍ RJ Krishna ✍

Hindi Poem by Rj Krishna : 111161315
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