kavyotsv 2
स्व रचित
तेरे किस रूप को नमन करूँ
जब आँख खुली तो अपने को
माँ की गोदी में पाया।
नानी,दादी,चाची,बुआ आदि ने
मेरे जन्म का जश्न मनाया।।
बहिनों ने भी खेल खिलौनों से
मेरा मन बहलाया।
बिना आपके एक कदम भी
आगे न चल पाया।।
शिक्षा के मन्दिर में भी
मैंने तुमको ही पाया।
बड़े प्यार से आपने हमको
जीवन का पाठ पढ़ाया।।
कई बार डॉक्टर जी बनकर
मौत के मुंह से छुड़ाया।
जीवन के हर मौड़ पर तुमने
हंस कर साथ निभाया।।
घर में बाहर गली खेत में
तुम्ही नजर आती हो।
कभी नही थकती जीवन में
हरदम मुसकाती हो।।
मैं तो नन्हा सा बालक हूँ
मैंअजरज में पड जाता हूँ।
कितने अगनित रूप तुम्हारे
समझ नही पाता हूँ।।
स्त्री,अबला,महिला,नारी
यह तुम तो नही हो सकती।
इन सब से ऊपर हो तुम कोई
ईश्वर की रची महाशक्ती।।
कैसे उपकार चुकाऊँ में
आपका कैसे धन्यवाद करूं।
इतने सारे रूप आपके
किस-किस रूप को नमन करूं।।
मेरी इच्छा है हर जन्म में मैं
तेरा ही आँचल पाऊँ।
अपने जीवन की कुर्बानी देकर
तेरा कर्ज चुकाऊँ।।
जमीला ख़ातून
सर्वाधिकार सुरक्षित