#kavyotsav_2
#बच्चपन_के_दिन #
ओ मासूम बातें,अल्हड अदाएं
बातों ही बात पर हम रूठ जाये
कुछ पूछने पर बिखर कर खूब रोना
बिना डर के सब बात कह जायें
ओ बच्चपन के दिन फिर लौट के आए
खेल -खेल में कही लोट जाना
धरती थी बिस्तर पूरा आसमा हमारा
फूलो पर बैठी ओ तितली उड़ाना
खिलौने भी से खुलकर बाते ओ करना
छोटी सी दुनियां थी खुशिया समाये
ओ बच्चपन के दिन फिर लौट कर आए
न भविष्य की चिंता,न अतीत का गम था
न खाने की चिंता ,न खेलने से फुर्सत
न जाड़े की ठिठुरन,न गर्मी से डर था
बाहे फैलाये बारिस में नाच आये
हर मौसम बहुत निराला बन कर आये
ओ बच्चपन के दिन फिर लौट कर आए