छोटी माँ
कोमल मन कोमल तन ले के
बिन माँ की बिटियाँ बड़ी हुई,
खेल कूद छोटी उम्र से
माँ के लाड से वंचित रही,
जब-जब माँ बच्चे के प्यार को
आस की नज़रों से देखे है,
तब-तब उसका नन्हा सा ह्रदय
माँ के प्यार को तरसे है,
एक दिन बोली कोमल होंठों से
भगवन मुझको भी माँ दे दे,
भगवन ने सुन ली उसकी पुकार
छोटी माँ के आने से चेहरे पर आई मुस्कान,
इस खुशी पर फूली ना समाई
पर दो पल में खुशी हुई पराई,
हर पल सुनने को मिलता ताना
मेरी कोख का ना तू दाना,
कोमल मन ये समझ ना पाया
सगे-सौतेले का ताना-बाना,
भाई-बहनों के साथ जब वो खेले
हाथ पकड़कर माँ उसे धकेले,
छोटी माँ ना कर ऐसा व्यवहार
तुझसे चाहूं मैं यशोदा का प्यार,
पर कठोर मन में ना कोई लचक आई
छोटी माँ कुन्ती कभी ना बन पाई,
समय बदला उम्र बदली
पर ना बदला माँ का अहंकार,
जवानी की दहलीज़ पर कदम रखा
माँ ने तानो पर ओर ज़ोर रखा,
फिर एक समय ऐसा भी आया
धूमधाम से उसका ब्याह रचाया,
आँखों में अंसुवन की लाली थी
पर उसकी वजह विदाई ना थी,
जिसको उसका साथी बनाया
दुगुनी उम्र के हाथ में हाथ थमाया,
जब-जब जीवन में ऐसी पीड़ा आई
नारी ही नारी की दुश्मन कहलाई!!