वो शान्त वो गहरी तेरी अॉखें।
कुछ कहते हुये मेरे चेहरे पर ठहरी तेरी अॉखें।।
कुछ न कहते हुए कई राज बताती तेरी अॉखें।
मन में मौन सा संगीत बजाती तेरी अॉखें।।
दिल के उजड़े हुए गुलशन को खिलाती तेरी अॉखें।
तेरे दिल के फंसाने की तहरीर सुनाती तेरी अॉखें।।
मुझको पागल मुझको दीवाना बनाती तेरी अॉखें।
चॉदनी हो या अन्धेरी सभी रातों को जगाती तेरी अॉखें।।
ओ हरजाई ओ सितमगर कितना सताती तेरी अॉखें।