तेरे बगैर भी जी रहै जिंदगी
बेजान चाबी वाले पुतले की तरह
जो जितना कहो वो करता है पर
उसमें जान नहीं होती
तेरे बगैर भी धड़कता है दिल
जो कभी तेरा नाम सुनते ही
जोरों से धड़कनें लगता था
तेरे बगैर भी हस लेते हैं हम
बेबजह और बेफितुल की तरह
जो दिल के दर्द को छुपा लेता है
तेरे बगैर भी चलतें है ये कदम
पर अब ये लडखडाये तो
थामने वाला कोई नहीं
तेरे बगैर भी है सब वही का वही
पर हम अब नहीं रहे वही के वही...